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Friday, May 19, 2017

सात सवाल : पलट’ मोमेंट होता है प्रेम में -सुशांत सिंह राजपूत



सात सवाल
पलट मोमेंट होता है प्रेम में
सुशांत सिंह राजपूत
सुशांत सिंह राजपूत ने टीवी से फिल्‍मों में कदम रखा। अपनी फिल्‍मों के चुनाव और अभिनय से वे खास मुकाम बना चुके हैं। उनकी राब्‍ता जल्‍दी ही रिलीज होगी,जिसे दिनेश विजन ने निर्देशित किया है।
-प्रेम क्‍या है आप के लिए?
0 प्रेम से ही सेंस बनता है हर चीज का। जिंदगी के लिए जरूरी सारी चीजें प्रेम से जुड़ कर ही सेंस बनाती हैं।
-प्रेम का पहला एहसास कब हुआ था?
0 बचपन में अकेला नहीं सो पाता था। मां नहीं होती थी दो रातों तक नहीं सो पाता था। मेरे लिए वही प्रेम का पहला एहसास था।
- रामांस की अनुभूति कब हुई
0 सच कहूं तो चौथे क्‍लास में। अपनी क्‍लास टीचर से मेरा एकतरफा रोमांस हो गया था। वह मुझे बहुत अच्‍छी लगती थीं। उन्‍हें भी इस बात का अंदाजा था।
-हिंदी फिल्‍मों ने आप को प्रेम के बारे में क्‍या सिखाया और बताया?
0लड़कियों को चार्म कैसे करते हें। मेरे पास कोई रेफरेंस नहीं था। मुझे एकदम याद है कि दिलवाले दुल्‍‍हनिया ले जाएंगे देखने के बाद लगा कि लड़का तो ऐसा ही होना चाहिए। उसके बाद कुछ कुछ होता है देख कर शाह रूख की तरह होने की इच्‍छा हुई। इन फिल्‍मों के समय मैं पांचवीं और आठवीं में था।
-प्रेम में कोई पलट मोमेंट होता है क्‍या?
0 होता है,बिल्‍कुल होता है। मैं आठवीं में था और लड़की दसवीं में थी। उन्‍हें देखता रहता था और फीलिंग रहती थी कि वह पलटेंगी...उनके पलटने से विश्‍वास बना रहता था कि व‍ह फिर से पलटेंगी।
-प्रेम कैसे जताना चाहिए?
0मुझे लगता है कि छ़ुपाना नहीं चाहिए। एक बार बता देना चाहिए। उसके बाद जो हो,सो हो। सीधे शब्‍दों में बता दो।
-क्‍या बताएं? आई लव यू...
0 मेरे हिसाब से एक्‍थ्‍शन से अधिक जरूरी इंटेंशन है। बोल देना चाहिए। बोल कर आलिंगन करेंगे तो उसका मतलब प्रेम होगा। बाकी इन दिनों आलिंगन(हग) तो सभी का करते हैं।

Tuesday, May 16, 2017

सात सवाल : कृति सैनन



कृति सैनन
-अजय ब्रह्मात्‍मज
सात सवाल
-यहां आने से पहले हिंदी फिल्‍मों के प्रति क्‍या परसेप्‍शन था?
0 बिल्‍कुल आम दर्शकों की तरह ही मेरा परसेप्‍शन था। मीडिया के जरिए जो पढ़ती और सुनती थी,वही जानती थी। इसका ग्‍लैमर आकर्षित करता था। लगता था कि स्‍टारों के लिए सब मजेदार और आसान होगा। बस,डांस करना है।
-परसेप्‍शन क्‍या बदला?
0 आने के बाद पता चला कि बहुत मेहनत है। फिल्‍म इंडस्‍ट्री के हर डिपार्टमेंट में काम करनेवालों के लिए रेसपेक्‍ट बढ़ गई है। एक छोटे से सीन के लिए भी सौ चीजें सोचनी पड़ती हैं। कई बार दर्शक उन पर ध्‍यान भी नहीं देते,लेकिन वही सिंक में न हो तो खटकेगा।
- कहते हैं यह टीमवर्क है?
0 बिल्‍कुल। हर डिपार्टमेंट मिल कर ही फिल्‍म पूरी करता है। फिल्‍मों में काम करने के बाद ही यह सब पता चला। मुझे लगता है कि क्रिटिक और दर्शकों को भी सभी के काम पर गौर करना चाहिए।
- हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री की क्‍या खासियत है?
0 विविधता है। हर तरह की प्रतिभाएं हैं। फिल्‍मों के विषयों की विविधता तो गजब की है। मैं देखती हूं कि अलग-अलग कारणों से सभी जुड़े हैं। एक बात समान है कि सभी को मेहनत करनी पड़ती है।
- हम कैसे अलग हैं?
0 कल्‍चर बहुत महत्‍वपूर्ण है। हमारे देसी भारतीय इमोशन अलहदा हैं। उनके बगैर हमें मजा नहीं आता1 म्‍यूजिक खास है हमारा। हमें फिल्‍म की कहानी याद रहे ना रहे...गाने याद रह जाते हैं। हम गीत-संगीत से कितनी बातें कह जाते हैं।
- फिल्‍म में दिख रहा समाज और वास्‍तविक समाज में कोई फर्क है क्‍या?
0 दोनों समाजों की दूरी धीरे-धीरे कम हो रही है। पहले के किरदार फिल्‍मी होते थे। अभी के किरदार रियल होते हैं। दर्शक भी सच के करीब की फिल्‍में देखना पसंद करने लगे हैं। दर्शकों को रियल के साथ मनोरंजन भी चाहिए।
- आप की सबसे फेवरिट फिल्‍म कौन सी है?
0 हम आप के हैं कौन मैं अनगिनत बार देख चुकी हूं। 

Monday, May 1, 2017

सात सवाल : अर्जुन कपूर



सात सवाल
अर्जुन कपूर
मोहित सूरी निर्देशित हाफ गर्लफ्रेंड में अर्जुन कपूर बिहारी युवक माधव झा का किरदार निभा रहे हैं। चेतन भगत के इसी नाम के अंग्रेजी उपन्‍यास पर आधारित इस फिल्‍म के लिए अर्जुन कपूर ने भाषा और आचार-व्‍यवहार पर मेहनत की। वे पटना भी गए। बिहारी मूल के व्‍यक्तियों के संपर्क में रहे। उन्‍होंने माधव झा को पर्दे पर उतारने की हर कोशिश की है।
-बिहार के बारे में आप कितना जानते हैं?
0 इस फिल्‍म के पहले ऊपरी तौर पर ही जानता था। मैं इस फिल्‍म के पहले भी एक बार पटना जा चुका हूं। उसे देखा और महसूस किया है। मनोज बाजपेयी के साथ तेवर के प्रचार के समय गया था। कह समता हूं कि मैं बिहार जा चुका हूं।
- हाफ गर्लफ्रेंड के माधव झा की तैयारी में और क्‍या समझ बढ़ी?
0 बिहार के बारे में शेष भारत क्‍या सोचता है और असलियत दोनों में फर्क है। अब लगता है कि मेरे बिहारी दोस्‍तों पर क्‍या बीतती होगी,जब कुछ सामान्‍य टिप्‍पणियां धारणा के आधार पर कर दी जाती हैं। वे बातें चुभती होंगी। माधव झा को भी झेलना पड़ता है फिल्‍म में।
-ऐसा क्‍यों होता है?
0 हम सभी का माइंडसेट बन जाता है। हम सोच लेते हैं कि अच्‍छा फलां स्‍टेट का है तो ऐसा ही होगा। फिल्‍म और किरदार के लिए मैं उन धारणाओं पर अमल नहीं करना चाहता था। हम ने बनावटी बिहारी नहीं रखा है किरदार को। फिलम देखने पर सभी मानेंगे कि हम ने बिहार का खयाल रखा है।
-बिहार के किसी व्‍यक्ति को आप जानते हैं करीब से?
0 मेरे लिए तो मनोज बाजपेयी हैं। वे बिहारी होने पर गर्व महसूस करते हैं। सोनाक्षी को जानता हूं,जो बिहारी बाबू की बेटी हैं। दोनों से मैं तेवर में ही मिला और करीब से देखा। प्रकाश झा हैं। उन्‍होंने तो बिहार को पर्दे पर पेश किया।
- क्‍या धारणा बनी है बिहार के बारे में?
0 मैंने देखा कि बिहारियों में राजनीतिक झुकाव के साथ अच्‍छी राजनीतिक समझ भी है। वे भारत को अच्‍छी तरह जानते हैं। भारत की असलियत को आप किसी बिहारी से समझ सकते हैं। वे विकासशील भारत के प्रतिनिधि हैं। वे सभी को आप कह कर संबोधित करते हैं। महिलाओं के प्रति उनका आदर अनुकरणीय है।
- क्‍या सचमुच बिहार पिछड़ा है?
0 मैं नहीं मानता। इतिहास और परंपरा में वह आगे रहा है। वहां के युवक सभी क्षेत्रों में अच्‍छा कर रहे हैं। उनमें आत्‍मविश्‍वास और एटीट्यूड है। वे बदलाव के लिए तैयार हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस दशक में बिहार काफी आगे आ जाएग।
- क्‍या फिर से बिहार जाना चाहेंगे?
0 बिल्‍कुल...जाउुंगा और ज्‍यादा समय बिताऊंगा।